Wednesday, April 22, 2009

वियोग के बादल छाए..

दिल चुरा के चले गए।
दो गज की दूरी छोड़कर॥
मै वहा से हिल न सकी।
तुम चले गए मुह मोड़ कर॥

मै पीया गम को तुम्हारे।
तुम भी गागर थाम लिए॥
जब जल पूरा भर गया ।
हस के यूं ही फोड़ दिए॥

अब ठाथर तन हुआ।
मन में बसा वियोग॥
फिर से तुमसे मिलन हो॥
हस कहता संयोग॥
वियोग के बादल छाए..

3 comments:

  1. बहुत अच्छी नज्म
    मजा आ गया

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  2. बढिया गीत है।बधाई।

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  3. शुक्रिया आप सभी को..

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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