Thursday, April 16, 2009

सासू चलीसा

दोहाः मेरे पति की मात हे सदा करव कल्याण..
तुम्हरी सेवा में न कमी रहू हरदम रखूं ध्यान//

जय जय जय सासू महरानी हरदम बोलो मीठी वाणी.
तुम्हरी हरदम करवय सेवा फल पकवान खिलाउब मेवा//

हम पर ज्यादा करो न रोष हम तुमका देवय न दोष.
तुम्हरी बेटी जैसी लागी तुम्हारी सेवा म हम जागी//

रूखा-सूखा मिल के खाबय करय सिकायत कहू न जावय
पति देव खुश रहे हमेशा उनके तन न रहे क्लेशा.

इतना वादा कय लिया माई फिर केथऊ कय चिंता नाही//
जीवन अपना चम-चम चमके फूल हमरे आंगन म गमके.

जैसी करनी वैसी भरनी तुम जानत हो मेरी जननी//
संस्कार कय रूप अनोखा कभौ न होय हमसे धोखा.
हसी खुशी जिनगी बीत जाये सुख दुख तो हरदम आये//

दोहाः रोग दोष न लगे ई तन मा.जाता रहे कलेश
सासू मॉ की सेवा जो करे खुशी रहे महेश..

बोलो सासू माता की जै,,

3 comments:

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--- संजय सेन सागर

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