Sunday, April 5, 2009

भारत का वसीम अकरम...जहीर

मनीष कुमार
असिस्टेंट प्रोड्यूसर



दोनों बाएं हाथ के गेंदबाज। दोनों ही तेज गेंदबाज। दोनों का एक जैसा अंदाज, एक जैसा जोश और एक जैसा ही जज्बा। एक वसीम अकरम तो दूसरा जहीर खान। वैसे वसीम अकरम से जहीर खान की तुलना तो बेमानी होगी लेकिन हाल के दिनों में जहीर ने जिस तरह गेंदबाजी की है वो अकरम से कम नहीं है।



आज से करीब 9 साल पहले जब जहीर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था तो लोग उनकी तुलना वसीम अकरम से करने लगे थे। लेकिन कुछ साल बाद ही जहीर की गेंदों की धार खत्म हो गई। ऐसा लगा कि उनके करियर का अस्त हो गया है। साल 2006 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद जहीर का अलग रूप देखने को मिला। उन्होंने अपनी गेंदबाजी से एक बार फिर अकरम की याद दिला दी।



- मौजूदा दौर में जहीर, अकरम की तरह गेंद को विकेट के दोनों और स्विंग करा सकते हैं।
- गेंद पुरानी हो या नई, उन्हें अकरम की तरह कोई फर्क नहीं पड़ता।
- जहीर तेज गेंदों के साथ-साथ स्लोअर गेंदों का भी बखूबी इस्तेमाल करते हैं।
- अकरम ने दुनिया की हर पिच पर शानदार गेंदबाजी की। वही हाल इन दिनों जहीर का है। वो चाहे भारतीय उपमहाद्वीप की बेजान विकेट हो या फिर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की तेज और उछाल भरी विकेट। जहीर का हर पिच पर जलवा रहा है।
- न्यूजीलैंड में जहीर हवा के रुख का भी अपनी गेंदों में बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसा अकरम किया करते थे।
-जहीर ने भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर 102 विकेट लिए हैं जबकि यहां की बेजान विकेट पर उन्होंने 106 विकेट चटकाए हैं।



पिछले दिनों खुद वसीम अकरम ने जहीर को मौजूदा दौर का सबसे अच्छा तेज गेंदबाज करार दिया था। उन्होंने कहा था कि \'इसमें कोई शक नहीं कि जहीर मौजूदा दौर के सबसे अच्छे तेज गेंदबाज हैं। वो गेंदों को दोनों तरफ स्विंग कराने के अलावा रिवर्स स्विंग भी करा सकते हैं। वो हर तरह की गेंद डाल सकते हैं\'



इतना ही नहीं वसीम अरम समय-समय पर बल्ले से भी जलवा दिखाते थे। कुछ ऐसा ही जहीर खान भी कर रहे हैं। अगर टॉप ऑर्डर बिखर जाता है तो जहीर रन भी बनाते हैं।



- याद कीजिए न्यूजीलैंड के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट में 51 रनों की पारी।
- पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बैंगलोर टेस्ट में 57 रन।
- साल 2002 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 46 रनों की पारी।



भारत में बहुत ही कम ऐसे तेज गेंदबाज हुए हैं जिसने लम्बे समय तक राज किया हो। मसलन एक हवा के झोंके के साथ श्रीशांत, इरफान पठान, देवाशीष मोहंती जैसे तेज गेंदबाज आए और गायब हो गए। पठान को लोग अब गेंदबाज से ज्यादा बल्लेबाज के तौर पर जानते हैं। लेकिन जहीर साल 2005 में कुछ समय तक टीम से बाहर रहने के बाद भी तेज हवा के झोंके के साथ वापस आए। और आज विदेश में अगर टीम इंडिया जीत का दावा कर रही है तो टीम का सबसे बड़ा हथियार जहीर खान ही हैं। यानी जहीर खान की गेंदबाजी और बल्लेबाजी उम्र बढ़ने के साथ साथ और भी घातक होती जा रही है। लेकिन अकरम तक पहुंचने के लिए उन्हें और भी मंजिलें तय करनी होंगी।
यह लेख [ibnkhabar.com]से साभार लिया गया है !
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1 comment:

  1. अच्छी समीकरण पेश किया मनीष जी ने

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--- संजय सेन सागर

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