Monday, April 13, 2009

दोहे, पादुका महात्म्य, पन्हैया,

पान पन्हैया की रही, भारत में पहचान.
पान बन गया लबों की, युगों-युगों से शान.
रही पन्हैया शेष थी, पग तज आयी हाथ.
'सलिल' मिसाइल बन चली, छूने सीधे माथ.
जब-जब भारत भूमि में होंगें आम चुनाव.
तब-तब बढ़ जायेंगे अब जूतों के भाव.

- आचार्य संजीव 'सलिल' सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम

3 comments:

  1. नमस्‍ते,
    यह पोस्‍ट आपसे सम्‍बन्धित है इस लिये भेज रहा हूँ
    http://pramendra.blogspot.com/2009/04/blog-post_14.html

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  2. बढ़िया लेखन
    इसी तरह आगे अग्रसर हो
    यही सुभकामना है !

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  3. बढ़िया लेखन
    इसी तरह आगे अग्रसर हो
    यही सुभकामना है !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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