Tuesday, April 21, 2009

प्रेम

April 2009

प्रेम की परिभाषा ------------------------------
प्रेम की परिभाषा तुझी से साकार हैनारी तू ही जीवन का अलंकार है । तुझे नर्क का द्वार समझते हैं जो,उनकी दकियानूसी सोच पर धिक्कार है । दुनिया की आधी आबादी हो तुम,बेशक तुम्हे बराबरी का अधिकार है ।कंधे से कन्धा मिलाकर आगे बढो,तुम्हारी उड़ान ही तुम्हारी ललकार है ।
Posted by DR.MANISH KUMAR MISHRA at 06:11 0 comments
Labels:

1 comment:

  1. बहुत खूबसूरत दोस्त!
    आपका सहयोग मिल रहा है अच्छा लगता है..आगे भी आप से इसी तरह के सहयोग की आशा के साथ.......
    संजय सेन सागर
    जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान
    मोबाइल-९९०७०४८४३८

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...