Thursday, April 23, 2009

मां के आंसुओं का जवाब जनता क्यों देगी वरुण ?

दिनेश काण्डपाल जी वॉयस ऑफ इंडिया में एंकर है और आप इनके लेखन की भाषाशैली और सटीकता इनके इस लेख को पढ़कर भली-भांति समझ जायेंगे !हमारे अतिथि लेखक दिनेश काण्डपाल जी यह लेख ''हिन्दुस्तान का दर्द'' के लिए लिखा है इस लेख पर आपकी राय आमंत्रित है,आलोचना भी स्वीकार है !

क्यों भई वरुण गांधी ? मां के आंसुओं का हिसाब जनता क्यों देगी? क्या ये आंसू करगिल में शहीद हुये कैप्टन सौरव कालिया की मां के हैं? या कैप्टन विक्रम बत्रा की मां रो रही हैं जिनका बेटा करगिल जीत कर शहीद हो गया। इन बहादुरों की मांताओं की आंखों से आंसूं नहीं निकलते। मुम्बई हमले के बाद एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की मां की आंखें याद हैं आपको, वो बहादुर बेटे की मां हैं। आंसू टपका कर ये अपने बेटे के शौर्य को कम नहीं करतीं। ये मांताऐं बेहद खामोशी और दृढ़ता से फिर से ऐसे ही शूरवीर बनाने में जुट जाती हैं जो फिर देश पर कुर्बान हो सकें। ये शौर्य और सहास की प्रतिमायें अपने आंसुओं का हिसाब मांगने चुनावी सभाओं में नहीं जातीं। जब कैप्टन सौरव कालिया जब शहीद हुये उसके बाद रक्षा बन्धन का त्यौहार आया, तब भी करगिल की लड़ाई चल रही थी। ऑल इंडिया रेडियो के लिये एक स्पेशल फीचर बनाने के लिये मैं सौरव की बहन से मिला, भरे हुये मन से मैने उनसे पूछा कि इस बार राखी पर सीमा पर खड़े फौजियों के लिये क्या संदेश देना चाहेंगीं। जो जवाब सौरव कालिया की बहन ने दिया उससे मेरे रोंगटे खड़े हो गये। उन्होंने कहा कि मैं अपने फौजी भाईयों से बस इतना ही कहना चाहती हूं कि बस अब हमारी तरफ से कोई शहीद नहीं होना चाहिये..अब जो भी लाश गिरे वो दुश्मन की होनी चाहिये। ये हमारे देश की मां बहनों का बानगी है।
क्या नौजवान नेता मां के आंसुओं को ढा़ल बनाता है ?
एक नौजवान नेता के चुनावी भाषण में क्या मां के आंसुओं का हिसाब मांगा जाना चाहिये। क्या मां के ऊपर कोई ज़ुल्म हो गया है। क्या मां को किसी ने कुछ कर दिया है। मां के आंसू तो अपने बेटे के लिये निकले हैं और बेटे की करनी पर कारवाई चल रही है, इसे देख कर ही तो मां रोई है। बेटे को कष्ट में देखेगी तो मां तो रोयेगी ही। क्या वरुण का कष्ट ऐतिहासिक कष्ट है। क्या मेनका के आंसू इतिहास बदलने जा रहे हैं। वरुण किस बात पर अपनी मां के आंसुओ का हिसाब मांग रहे हैं। हज़ारों मांओं की आंखों से आंसू पोछने की ज़िम्मेदारी जिसे अपने कंधे पर लेनी चाहिये वो अपनी मां के आंसुओं को पोछने के लिये वोट मांग रहा है।
कोई काम की बात क्यों नहीं करते हैं वरुण ?
कैसी वाहयात बात करते हैं ये नेता कि मायावती मां होती तो बेटे का दर्द जानती। मेनका का बेटा, बेटा और दूसरे के बेटे का क्या। कितने बेकसूर जेलों में सड़ रहे हैं उनका मेनका ठेका क्यों नहीं ले रहीं। वरुण ने जनता के बीच जाकर भाषण दिया है। अच्छा है या बुरा है, सही है या गलत है ये फैसले करने के लिये व्यवस्थायें लगी हुयी हैं। बड़ी अजीब बात है आप संवैधानिक संस्थाओं के सहारे भी चल रहे हैं फिर आप अपने भाषण में भी मां के आंसुओं का हिसाब मांगने लगते हैं। जहां आपको ये बताना चाहिये कि आप जनता की सेवा किस तरह से करेंगे वहां आप मां के आंसुओं की ढ़ाल लेकर खड़े हो जाते हैं। अपने विरोधियों को आप ओसामा बिन लादेन बताने लगते हैं लेकिन आप क्या करेंगें ये बात आपकी ज़बान पर ही नहीं आती।
वरुण को इमोशनल मुद्दा ही क्यों सुहाता है ?
क्या बात है। आखिर वरुण को इमोशनल मुद्दे ही क्यों रास आते हैं। पर्चा दाखिल करने से पहले वरुण ने जो भाषण दिया उसे कोई मनीषी आखिर बताये कि उसमें जनता के कौन से हित की बात की गयी है। पीलीभीत का विकास कैसे होगा। वहां की जनता की परेशानियां क्या हैं ये वरुण के भाषणों का हिस्सा क्यों नहीं होता है। हर वक्त इमोशनल कर देने वाली बांते। हिन्दू श्रोता खड़े हैं तो उनकी धार्मिक जज़्बातों वाली इमोशनल बाते कर दीं, जब सबकी नज़रें कड़ी हो गयीं तो मां के आंसुओं का हिसाब करने की बात करने लगे। राजनीति में वैसे ही पढ़े लिखे नौजवानों का टोटा होता जा रहा है, कोई राजनीति में आना ही नहीं चाहता। नेता पुत्र अपना वरचस्व बनाये हुये हैं ऐस में वरुण ज़रा अपने मन में पूछें कि उन्होंने कौन से आदर्श स्थापित कर दिये हैं।
क्या सिखा रहे हैं वरुण ?
वायस आफ इंडिया पर एक टॉक शो में मैने बाहुबली नेता पप्पू यादव से पूछा कि आज के नौजवान पप्पू यादव से क्या सीखे....जो जवाब पप्पू ने दिया उस से मुझे शर्म आ गयी। पप्पू यादव ने कहा कि क्या बात कर रहे हैं आप आज के नौजवान हमसे कई बातें सीख सकते हैं..वो हमसे सीख सकते हैं कि कैसे लगन से जनता की सेवा की जाय..गरीबों की मदद कैसे की जाय..
फिर हड़बड़ाते हुये पप्पू ने कहा और भी कई सारी बातें है जो नौजवान हमसे सीख सकते हैं ...लेकिन एक ठोस बात पप्पू यादव अपने बारे में नहीं बता सके कि आज का नौजवान पप्पू से क्या सीखे।
यहां पर मैं तुलना नहीं कर रहा हूं लेकिन अगर वरुण से भी यही सवाल पूछा जाय तो क्या जवाब आयेगा। वरुण क्या ये बतायेंगें कि जहां जनता को विकास की रोशनी दिखाने की बात करनी जाहिये वहां इमोश्नल तीर कैसे चलाये जाते हैं ये कोई नौजवान उनसे आकर सीख ले। राष्ट्रीय स्तर का नेता बनने का सपना देखने वाली वरुण क्या इस मुगालते में हैं कि वो इमोश्नल मुद्दों पर बहका लेंगें
एक तो नोजवान वैसे ही वोट देने घर से बाहर नहीं आ रहा ऊपर से ऐसे नेता अगर हो गये तो समझो बज गया लोकतंत्र का बैंड।
हम भी क्या इमोश्नल वोटर ही बने रहेंगें
जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक भारत एक खोज पर जब श्याम बेनेगल ने धारावाहिक बनाया तो उसमें चाणक्य सेल्यूकस के दूत कहते हैं कि भारतीय जनमानस मूलतह भवावेश में काम करता है इसलिये सोचने का शक्ति कई बार कुंद पड़ जाती है। इसी बात का फायदा उठा कर हर नेता ने इस जनमानस को हमेशा गलत दिशा दिखलायी है। हम क्या कर रहे हैं। हम भी क्या इमोश्नल वोटर ही बने रहेंगें। अगर आपने गजनी फिल्म दखी है तो उसमें आमिर का एक बेहतीरन डॉयलॉग है उस डायलाग में आमिर कहते हैं कि इंसान को जज़बातों के साथ काम करना चाहिये, जज़बाती होकर नहीं। इस डायलॉग से हिन्दुस्ताने के ज़यादातर वोटरों को सीख लेनी चाहिये। फर्क तो करना ही होगा। ये भी देखना होगा की कैप्टन सैरव कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा और मेजर संदीप उन्नीकृषण्न कीं मां क्यों अपने बेटे की शहादत पर आंसू नहीं बहाती हैं और वहीं,
वोट मांगने के लिये बेटा अपनी मां के आंसुओं का हिसाब मांगने के लिये जनता को भड़काता है।
आगे पढ़ें के आगे यहाँ

37 comments:

  1. वरुण ने अपनी माँ के साथ साथ देश को कलंकित किया है अगर जनता ने उनके साथ इन्साफ किया तो उनके पास रोने के आलावा कुछ नहीं बचेगा
    दिनेश जी का लेखन प्रभावशाली है बहुत खूब

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  2. मैं कशिश जी की बात से सहमत हूँ की वरुण ने जो किया बुरा किया उसमे किसी का भला नहीं था
    यह देश को बांटने वाला कदम है
    दिनेश जी बधाई हो..अच्छा लिखा

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  3. वरुण गाँधी,पप्पू यादव और भी ऐसे कई अमीर माँ बापों की बिगड़ी औलादें देश को बर्बाद करने मे लगी हुई है जो कही ना कही बहुत ही घातक है
    लेखन की प्रशंशा करनी होगी

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  4. वरुण जी ने जो भी कहा सही कहा इन मुस्लिमों के साथ ऐसा ही होना चाहिए

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  5. क्या होना चाहिए मुस्लिमों के साथ,व्योम?????????
    आप यह मत भूलिए की इस देश पर हमारा भी बराबर का अधिकार है और जो हमें काटने की बात करेगा उसे भी काटा जायेगा

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  6. चलो छोडो आप गुजरात काण्ड भूल गयी हो क्या??
    लगता है एक और ट्रेलर की जरुरत है

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  7. बह एक निन्दनिये घटना थी लेकिन अब इसे दोहराया नहीं जा सकता क्यों मुस्लिम अब जाग चुके है

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  8. हां बहुत दीखता है की मुस्लिम जाग चुका है
    बह जाग गया होता तो १०-१५ बच्चे पैदा नहीं कर रहा होता
    इस्लाम सबसे गन्दा हो चुका है

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  9. आपकी सारी बातें बकवास है
    आपसे बहस करने का कोई ओचित्य ही नहीं है
    भगवान् आपको सद्बुद्धि दे

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  10. The post gives us a clear insight into the mindset of voters and the politicians in India.. I would like to congratulate Mr. Dinesh Kandpal for writing such an article which actually forces us to reflect on our responsibilities as citizens of one of the largest democracies in the world.. very few people like Dinesh can think on such issues with such an approach and a different angle..I really hope people read this and take advantage of the keen initiative Mr. Dinesh Kandpal has taken to enlighten the Indian voters and the Politicians....

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  11. जिस तरह की बात यहाँ पर दिनेश जी ने करी है उसमें कमियाँ निकालने और उस पर लड़ने की बजाये अगर हम उनका विश्लेषण करें और हिन्दू मुस्लिम से ऊपर उठकर अपने देश के विकास और लोकतंत्र की मजबूती पर ध्यान दें तो शायद दिनेश जी जैसे लोगों की मेहनत रंग लाये.. बात यहाँ हिन्दू मुसलमान की नहीं बात है हमारे नेताओं की जो हमारी इन कमजोरियों का फायेदा उठाते रहे हैं और हमें उन्हें ऐसा करने से रोककर अपना और अपने देश का फायेदा देखना है...
    धन्यवाद

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  12. अच्छा लेख है। लेख पढ़ कर उम्मीद बँधी की कलम की धार के बल पर पत्रकारिता करने का माद्दा रखने वाला एक और नौजवान मैदान में आ गया है। प्रार्थना करिए की ये श्रृंखला लम्बी बने।
    --- अमित त्रिपाठी

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  13. sahi baat hai janta kyon hisaab degi..koi virta ka kaam to kiya nahi hai ..jang me shahid bhi nahi hue hai ..to janta kyon chinta karne lagi..

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  14. दीपक जी बहुत ही सटीकता से आपने अपनी बात कही आपकी भाषासैली का मैं कायल हो चुका हूँ!वरुण जी की छोटी मानसिकता को आपने बहुत की बढ़िया ढंग से बताया !
    व्योम जी और साहिबा जी क्या बात है इस मंच की सारी संस्कृति और उद्देशों को भुला दिया है क्या?
    कुछ देश लिए भी सोचो अगर कोम के बाद वक़्त बचे तो!

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  15. दिनेश जी की बात से सहमत हूँ,यह नेता अपनी माँ के आँसू को भी बेचने से पीछे नहीं हटते वरुण अभी यही कर रहा है
    अच्छा लगा पढ़कर

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  16. दिनेश जी की बात से सहमत हूँ,यह नेता अपनी माँ के आँसू को भी बेचने से पीछे नहीं हटते वरुण अभी यही कर रहा है
    अच्छा लगा पढ़कर

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  17. क्यों न कौम की बात की जाये
    जब की बह ऐसी कौम है जो हमेशा हिन्दुओं को मिटाने की बात सोचती है
    मैं अपनी बात पर अडिग हूँ की वरुण सही है

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  18. हाँ एक बात और कहूँगा की व्योम जी को तो मैं नहीं जानता पर इतना तो कह ही सकता हूँ की यह किसी ग़लतफ़हमी का सिकार है
    क्योंकि भारत में कोई किसी पर हावी नहीं है
    सबमे प्यार है

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  19. आपको प्यार दीखता है
    भाजपा राम मंदिर के नाम पर आना चाहती है तो कांग्रेस बावरी मस्जिद के नाम पर
    क्या यही हमारा प्यार
    सब हथकंडे है,प्यार व्यार कुछ नहीं पदम् भैया

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  20. आपको प्यार दीखता है
    भाजपा राम मंदिर के नाम पर आना चाहती है तो कांग्रेस बावरी मस्जिद के नाम पर
    क्या यही हमारा प्यार
    सब हथकंडे है,प्यार व्यार कुछ नहीं पदम् भैया

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  21. व्योम जी आपकी सोच अलग है
    मेरा नजरिया भी जरा आपसे अलग है
    आप अपने अनुभव के आधार पर कह रहे है मैं अपने अनुभव के आधार पर
    हो सकता हो दोनों गलत हो या दोनों सही या कोई एक सही

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  22. यहाँ का माहोल लगता है काफी गरम हो चूका है तो मुझे तो बड़ी सोच समझकर अपनी राय देनी होगी सबसे पहले- दिनेश जी आप बधाई के पात्र है अच्छे लेखन के लिए
    वरुण सही या गलत इसका फैसला हम जनता पर छोड़ देते है और व्योम जी आप इस तरह की बात कर कर यह सिद्ध कर रहे है की अब तक जो हुआ उसमे सब आपकी ही गलती है

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  23. निश्चित तौर पर कल्पना जी बात सही है
    व्योम जी की सदयस्ता इन्ही वजहों से समाप्त की जा चुकी है फिर भी वो सुधरने का नाम नहीं ले रहे है जो उनके लिए हानिकारक है
    अच्छा लिखा है मित्र

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  24. व्योम जी काफी हुनर वां है लेकिन उनका हुनर गलत जगह लगा हुआ है

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  25. व्योम जी के बारे में आपकी राय सत् प्रतिसत सही है

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  26. बिलकुल सटीक लेख, काण्डपाल जी छा गये।

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  27. sahiba aap kyuon muh lag rahi hain vyom ke. ye sab modi ke chele lagte hain.

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  28. lagta hai tippni karne walo mein se adhikans logo ne article padhe bagair apni bhadas nikali hai .................. pata nahi kya mansha hai aapki salo bit gaye babri masjid se pichcha nahi chut raha ................

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  29. वर्तमान राजनीति के तीन तथाकथित युवा प्रतिनिधि राहुल , प्रियंका और वरुण ,सब के सब गाँधी !कांग्रेस हो या भाजपा गाँधी परिवार हावी है ! क्या देश में एक नेहरु खानदान ही नेता जनने की क्षमता रखता हैं ? कितना बड़ा दुर्भाग्य है हमारा , लोकतान्त्रिक देश में राजवंश की स्थिति बन गई है !
    क्या भाजपा में वरुण गाँधी को बढावा देकर वंशवाद को मजबूत नहीं किया जा रहा है ? क्या " party with difference " का नारा देने वाली भाजपा अपने मूल्यों और आदर्शों से भाग नही रही ? सत्ता पाने के लिए देश के लोकतंत्र को नेहरू परिवार के हवाले कर देना क्या उचित है ? पता नही , जनता क्या सोचती है ? न जाने क्यूँ कुछ युवा राहुल और वरुण के पीछे पागल हैं ? जो भी हो कम से कम भाजपा को परिवारवाद और वंशवाद से बचना चाहिए था !"

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  30. जयराम जी सही कहा आपने सब मुद्दे से भटक रहे है
    हिन्दू मुस्लिम बन चुके है,इंसानियत मर गयी है

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  31. संजय जी और जयराम जी इंसानियत मर गयी है ऐसा सच अब लगने लगा व्योम और साहिबा जी की बातों से
    कुछ कड़े कदम उठाने होंगे

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  32. संजय जी और जयराम जी इंसानियत मर गयी है ऐसा सच अब लगने लगा व्योम और साहिबा जी की बातों से
    कुछ कड़े कदम उठाने होंगे

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  33. मेरे ख्याल से किसी पर,किसी भी तरह के कदम उठाने की जरुरत नहीं है
    क्योंकि सबकी अपनी विचार धारा है
    और हम किसी को दवाना नहीं चाहते
    जो हो रहा है होने दीजिये

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  34. माहोल तो ख़राब कर ही रहे है कुछ लोग
    पर अपनी राय देने से किसी को रोकना भी सही नहीं है
    दिनेश जी ने अच्छा लिखा

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  35. माहोल तो ख़राब कर ही रहे है कुछ लोग
    पर अपनी राय देने से किसी को रोकना भी सही नहीं है
    दिनेश जी ने अच्छा लिखा

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  36. साहिबा जी आपने कहा की इस देश पर आपका भी बराबर का अधिकार है ........... यही मानसिकता ही ख़राब है ....... इसका मतलब ये हुआ की अभी तक आप लोग इस देश में अधिकार ज़माने की बात पर ही अटके हुए हैं ! जो वरुण गाँधी ने कहा वो साम्प्रदायिक है लेकिन जो आपके उलेमा और मौलवी करते हैं वो साम्प्रदायिक नहीं है ! यह बात हिन्दू भी जानते हैं की भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है ! लेकिन धर्म निरपेक्ष का मतलब यह नहीं होता की केवल एक या दो धर्मो को वोट के खातिर सार्री सुविधाएँ प्रदान कर दी जाएँ ! अगर आपको अपना धर्म जान से भी प्यारा है तो हमें भी अपना धर्म उतना ही प्यारा है ! ................. ठीक है हर मुस्लिम आतंकवादी नहीं है और हर हिन्दू देशभक्त भी नहीं है ! पर आपको ये समझना होगा की हर देश की एक सांस्कृतिक विरासत होती है ! उसको सम्मान सभी को करना चाहिए !
    वरुण गाँधी ने जो कहा वो इसलिए भी सही है की हम अपने देश को पाकिस्तान नहीं बना चाहते ! वैसे भी अगर हम हिन्दू साम्प्रदायिक होते तो सालों पहले ही सब धर्म परिवर्तन हो चूका होता ! हिन्दू सहिष्णु होता है इसलिए आखिरी सीमा तक तनाव टालने की कोशिश करता है ! लेकिन सिर्फ एक सीमा तक ! राम मंदिर अगर नहीं बना तो बाबरी मस्जिद तो कभी नहीं बन सकती ! ये निश्चित है ! इसलिए हिन्दू को गलत ठहराना बंद कीजिये !
    पहले अपने गिरेबान में झांकिए ! इस देश को अच्छा बनाने की कोशिश करिए न की अधिकार जताने की !
    जय हिंद , जय भारत , जय हिन्दू

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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