Friday, April 17, 2009

स्कूलों में नहीं दी जानी चाहिए सेक्स शिक्षा


नई दिल्ली. स्कूलों में सेक्स शिक्षा पर एक संसदीय समिति ने आपत्ति जताई है। समिति ने सुझाव दिया है कि इससे संबंधित पाठों को जीवविज्ञान के सिलेबस में प्लस टू से पहले नहीं जोड़ा जाए।
राज्यसभा की कमेटी ऑफ पिटीशंस ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि स्कूली बच्चों को साफ संदेश दिया जाना चाहिए कि शादी से पूर्व सेक्स नहीं किया जाना चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू नीत समिति ने कहा कि छात्रों को इस तथ्य के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए कि शादी से पहले सेक्स सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है।
समिति के मुताबिक, छात्रों को इस बारे में जागरूक किया जाए कि बाल विवाह अवैध तथा लड़की के स्वास्थ्य के लिहाज से घातक है। उन्हें इस बात की शिक्षा भी दी जानी चाहिए कि 16 वर्ष की उम्र के पहले सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध भी दुष्कर्म के बराबर हैं।
स्कूलों में सेक्स शिक्षा पर राष्ट्रीय बहस की मांग करने वाली याचिका पर रिपोर्ट में कहा गया है कि एचआईवी/एड्स के बारे में पाठ जीवविज्ञान के सिलेबस में उच्चतर कक्षाओं में जोड़े जा सकते हैं।
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2 comments:

  1. आपने ठीक कहा...हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत इतनी अच्छी.. है की हमे इस तरह की शिक्षा की जरूरत भी नहीं है...!क्यूंकि हमारे यहाँ अभी भी लोग सपरिवार रहते है..सो बच्चों को नैतिकता का पैमाना भली भाँती पता है...ये हम वर्षों से देखते आ रहे है...

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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