Wednesday, April 8, 2009

साथी का हाथ पकड़ कर चलना भरोसे का प्रतिक और विश्वास का नाम है ......

पार्क में देखा.... पति पत्नी एक दुसरे का हाथ पकड़कर चल रहे थे । डेली का उनका रूटीन था । जान पहचान वाले थे । एक दिन उनके घर जाने पर कारण पूछ ही लिया । पत्नी बोली ...साथी का हाथ पकड़ कर चलना भरोसे का प्रतिक और विश्वास का नाम है । यह हम दोनों को हमसफ़र होने की याद दिलाता है ।

2 comments:

  1. बिल्‍कुल सही कहा आपने

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  2. सोनिया जी , इस आलेख में अतुल जी ने खुशवंत की हकीकत खोल कर रख दी है , ऐसा नही की यह पहली घटना है खुशवंत सिंह तो अपनी यौन कुंठित बकवासबाजी हेतु ही जाने जाते है . ऐसे लोगो को भारत में पत्रकार के रूप में महिम्मंदित किया जाता रहा है जो शर्मनाक है .................... अरुंधती रोय ...... शोभा डे आदि भी इसी पीढी के कड़ी है ......................... राजेंद्र यादव के सहयोग से अरुंधती खुलेआम शादी को जेल बताती हैं ................. तो कभी कश्मिअर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करती है ..................... इन लोगो की निजी जिन्दगी को देखे तो वो भी बस कमर के निचे और घ्त्नो से ऊपर ही सिमित दिखती है .................अतुल जी की हिम्मत की दाद देता हूँ की उन्होंने इनके खिलाफ लिखा क्यूंकि इनके ऊपर लिखने और बोलने से आपको हिंदू कट्टरपंथी होने का आरोप लग सकता है ........ हो सकता है आपको भी प्रज्ञा के साथ होने के आरूप में रासुका लगा दिया जाए ........................

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--- संजय सेन सागर