Sunday, April 5, 2009

शे'र संजीव 'सलिल'

शे'र

संजीव 'सलिल'

तितलियों की चाह में दौडो न तुम।
फूल बन महको तो ख़ुद आयेंगी ये।

2 comments:

  1. बहुत अच्छा लिखा है

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  2. संजीव जी आपका दीवाना हूँ
    बहुत खूब लिखा है

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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