Thursday, April 30, 2009

एक शे'र: आचार्य संजीव 'सलिल'

सागरों-मीना 'सलिल' को दिन में छू पाते नहीं।

रात हो, बरसात हो तो कोई क्यों इनसे बचे?

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--- संजय सेन सागर

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