Friday, April 17, 2009

सपनो की तलाश


नींद में

सपने तलाशना (?)

ठीक है ;

आंखों में

सपने तलाशना (!)

भी ठीक है

लेकिन यदि कोई

सपनो में

सपने तलाशे .............!!

तो ..............??

आरती "आस्था "

3 comments:

  1. सुन्दर रचना लिखी है आरती जी आपने

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  2. मिर्चू मल पन्सारी ,
    या पुन्नू पनवाडी,
    घसीटा राम नाई,
    या ननकू हल्वाई ;
    दफ़्तर के बाबू की चिन्ता ,
    या स्मग्लर किन्ग की दुश्चिन्ता;
    सब्पर छाती है ,
    धीरे -धीरे आती है ,
    नींद , कितनी साम्यवादी है.
    सभी की आंखों को ,
    रोज़ शाम ढ्ले रातों को,
    सताती है,
    स्वप्नों के पन्खोंपर ,
    चद्कर आती है,
    नींद कितनी बडी साम्य्वादी है.

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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