Tuesday, April 21, 2009

दो दम का एक दोहा : आचर्य संजीव 'सलिल'

लोकतंत्र के देखिये, अजब अनोखे रंग।

नेता-अफसर चूसते, खून आदमी तंग॥

जंग करते हैं नकली।

माल खाते हैं असली॥

****

4 comments:

  1. अच्छा लिखा है बधाई हो

    ReplyDelete
  2. बहुत खूबसूरत दोस्त!
    आपका सहयोग मिल रहा है अच्छा लगता है..आगे भी आप से इसी तरह के सहयोग की आशा के साथ.......
    संजय सेन सागर
    जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान
    मोबाइल-९९०७०४८४३८

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...