Saturday, April 11, 2009

अश'आर - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

बेताब है सूरज सवेरा कब होगा?
इठलाती उषा आयेगी वो तब होगा।

जो रहा बेताब वो आगे बढ़ा है।
जो नहीं बेताब वो पीछे खड़ा है।

उठी चिलमन तो देखा हम रहे जिनके लिए बेताब।
चिलमन में छिपे वो भी हमारे लिए बेताब।

2 comments:

  1. संजीव जी सलाम है आपके लिए
    अच्छा लिखा है

    ReplyDelete
  2. अच्छा लिखा है
    बढ़िया लेखन

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...