Wednesday, April 15, 2009

शे'र आचार्य संजीव 'सलिल'

शे'र

आचार्य संजीव 'सलिल'

दोस्त जब मेहरबां हुए हम पर।
दुश्मनों की न फ़िर ज़रूरत थी।

1 comment:

  1. आप जैसा दोस्त हो तो दुश्मनों की जरुरत ही क्या है कुछ इसी तरह का भाव है आपके शेर में
    बढ़िया बहुत खूब!

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...