Saturday, April 4, 2009

गीत

आचार्य संजीव 'सलिल'

संकट में,
हिम्मत मत हार।
कोशिश का
खुला रहे द्वार....

शूल बीन
फूल नित बिखेर।
हो न दीन,
कर नहीं अबेर।
तम को कर
सूरज बन पार....

माटी की
महक नहीं भूल।
सर न चढ़े
पैर दबी धुल।
मारों पर न
करना तू वार...

कल को दे
कल से अब जोड़।
नातों को
पल में मत तोड़।
कलकल कर
बहे 'सलिल'-धार...

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कलकल कर बहे 'सलिल'-धार...

3 comments:

  1. अच्छा लिखा है आपने
    यहाँ पर पड़ा आपका हर एक लेख प्रभावसाली है

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  2. बढ़िया लेखन
    इसी तरह आगे अग्रसर हो
    यही सुभकामना है !

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  3. बढ़िया लेखन
    इसी तरह आगे अग्रसर हो
    यही सुभकामना है !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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