Monday, April 13, 2009

अब पता चल ही गया बेइंतहा प्यार का राज

सालों से वैज्ञानिक इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों हम किसी की परवाह करते हैं और क्यों अनजाने में ही यह परवाह बेपनाह मोहब्बत में बदल जाती है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने बेइंतहा प्यार के राज को ढूंढ निकाला है।
मॉन्ट्रियाल यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रिसर्च इंटू न्यूफिजियोलॉजी एंड कॉगनिशन के प्रोफेसर मारियो ब्यूरगार्ड ने अपने शोध में पाया इनसान के दिमाग के 7 अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली विभिन्न क्रियाओं के कारण ही हमारे मन में किसी दूसरे इनसान के लिए भावनाएं पैदा होती हैं।
बिना किसी इच्छा के दूसरों से प्यार करने को आध्यात्मिक प्यार का सबसे ऊंचा भाव माना गया है। मारियो लोगों के बेइंतहा प्यार की भावनाएं जानकार इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
उन्होंने अध्ययन में शामिल लोगों को एमआरआई स्कैन के दौरान अपने दिमाग में प्यार की भावनाएं उभारने को कहा। इस दौरान उन्होंने पाया कि दिमाग के 7 क्रियाशील क्षेत्रों में से 3 ठीक उसी तरह क्रियाशील थे जैसे रोमांटिक प्यार के दौरान होते हैं। बाकी क्षेत्र अन्य तरीके से क्रियाशील थे, जिससे पता चलता है कि उस वक्त प्यार के भाव अलग थे।
अध्ययन में पता चला कि बेपनाह प्यार की भावनाओं के दौरान दिमाग के जो हिस्से क्रियाशील थे, वे डोपामाइन के दौरान भी क्रियाशील थे। डोपामाइन ऐसा केमिकल होता है, जो खुशी के दौरान क्रियाशील होता है।
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2 comments:

  1. achchi jaankaari aapke madhyam se mili sanjay ji ashaa hai aur bhi jaankariyaan aap pardaan karenge

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  2. aleem ji jaankari ka kahzana to hum bhi rakhte hai yaha bhi aayiye kabhi

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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