Wednesday, April 1, 2009

हिंदुस्तान का दर्द... आचार्य संजीव 'सलिल'

हिंदुस्तान का दर्द...

झूठे नेता...

लोलुप अफसर...

मुनाफाखोर व्यापारी...

कानून तोड़नेवाली जनता...

मँहगे आम चुनाव...

नैतिकता का अभाव...

मस्ती को जीवन मानते युवा...

देह उघाड़ता दूरदर्शन...

घर फोड़ते सीरिअल...

बेबस हम-आप...

परेशां --भारत माता...

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5 comments:

  1. संजीव जी बहुत खूब लिखा है
    हिन्दुस्तान का दर्द

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  2. आचार्य जी
    पहले गौ माता कटी
    बिसरा दी फिर मात
    भारतमाता क्‍या करे
    हुई अंधेरी रात।

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  3. बहुत खूब लिखा है

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  4. हिदोस्तान का दर्द-
    इस मौजू के एक कविता-
    जो भी दिल्ली जाता है हो जाता चांडाल है पढें यहां
    http//:katha-kavita.blogspot.com

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  5. जो भी दिल्ली जाता है हो जाता चांडाल है पढें यहां

    http//:katha-kavita.blogspot.com/

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--- संजय सेन सागर

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