Tuesday, March 31, 2009

ग़ज़ल

तूफ़ान मेरे सर से गुज़रता क्यों नही जाता
दरिया मेरी कश्ती में उतरता क्यो नही jaata
सदियों से भी हालात के दलदल में फसा हूँ
सूरज मेरे अन्दर का उभरता क्यों नही jaata
ताबीर खंज़र से ज़ख्मी मेरी आंखें
मई खवाब के मानिंद बिखर क्यों नही जाता
धुप मिली छाओं मिला धुप से साया
फिर रेत के सेहरा में शजर मिलने क्यों जाता।
अलीम आज़मी.....

1 comment:

  1. सुन्दर ग़ज़ल
    बहुत खूब दोस्त

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...