Tuesday, March 24, 2009

ईश्वर से बढ़ कर कोई नहीं है !

मैंने आज देखा हमारे ब्लॉग मित्र विनय जी ने कुछ बातें अपने पोस्ट में में लिखीं, मुझे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह माँ (जिसने जन्म दिया) की महिमा लिख रहे थे या ईश्वर के बारे में संशय व्यक्त कर रहे थे | वैसे मुझे जो महसूस हुआ वह यह था कि विनय जी के मुताबिक ईश्वर से भी बड़ा दर्जा माँ का है| वैसे मैं बता दूं कि मेरी माँ भी अब इस दुनिया में नहीं है | और मैं भी कभी कभी उसे याद कर रोता हूँ| मैं उसकी बहुत इज्ज़त करता था और ....... खैर ! मैं विनय जी को बता दूं की, ईश्वर से बढ़ कर कोई नहीं है, माँ और बाप भी नहीं !!!  

क्यूंकि अगर यह सत्य होता तो कहानी कुछ और होती.... मैं बताना चाहता हूँ कि "हम सब एक तुच्छ वीर्य थे, नौ महीना की अवधि में विभिन्न परिस्थितियों से गुज़र कर अत्यंत तंग स्थान से निकले, हमारे लिए माँ के स्तन में स्वतः दूध उत्पन्न हो गया, कुछ समय के बाद हमें बुद्धि ज्ञान प्रदान किया गया, हमारा फिंगर प्रिंट सब से अलग अलग रखा गया, इन सब परिस्थितियों में माँ का भी हस्तक्षेप न रहा, क्योंकि हर माँ की इच्छा होती है कि होने वाला बच्चा गोरा हो लेकिन काला हो जाता है, लड़का हो लेकिन लड़की हो जाती है।" अब सोचिए कि जब कोई चीज़ बिना बनाए नहीं बना करती जैसा कि आप भी मानते होंगे तथा यह भी स्पष्ट हो गया कि उस में माँ का भी हस्तक्षेप नहीं होता है तो अब सोचें कि क्या हम बिना बनाए बन गए ?????

कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ?  
इसलिए कि ईश्वर की कल्पना मानव के हृदय में पाई जाती है, पर अधिकांश लोग अपने ईश्वर को पहचान नहीं रहे हैं। 

मुझसे असहमत लोगों की आलोचनाओं का स्वागत है!!!  

आपका भाई, 
सलीम खान 
स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ 
लखनऊ व पीलीभीत, उत्तर प्रदेश

8 comments:

  1. निश्चित रूप से ईश्वर से बढ़कर कोई नहीं है
    लेकिन माँ भी ईस्वर के सामान ही है !
    अच्छा लेख !

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  2. बिलकुल सलीम आपने सही लिखा है बिना ऊपर वाले के मर्ज़ी बगैर परिदाह पर नहीं हिला सकता हाँ मानते है इश्वर ने माँ को एक बेहतरीन दर्जः दिया है जिसकी सभी कद्र करते हैं

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  3. ye aap nahi andar ka islaam bol raha hai vinay jee se asahmat ho sakte hain aap . par yahi to bharat ki sadiyon purani parampara rahi hai jisme maa aur guru ko ishwar se badhkar mana gaya hai. yahan to har ek manushya ke bhitar ishwar ki was mana gaya hai ..............
    aap ko bhala ye sahan kaise hoga arab ki sabhyta me aisa hai hi nahi !
    ek baat batayiye agar main apni maa ko ishwar manta hoon to (kewal apne liye ,aapko nahi kahunga ) aapko kya dikkat hai ? kyun kisi ke niji soch ko badalne ki bekar koshish karte hain .
    yahi ek bat galat hai aap log asahmat logo ko badal kar rakh dena chahte hai chahe jis bhi tarike se .......... ye baat samajh lijiye ke duniya aapke kahne ye sochne se nahi chalegi ... dusro ko badalne ke bajay khud me badlaw ki is prawritti ko badlen ..............

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  4. @संजय जी,

    देखिये ! आपने कुछ इस तरह कहा है,

    "हज़ार का नोट निश्चित रूप से सबसे बड़ा नोट है,
    लेकिन पांच सौ का नोट भी हज़ार के नोट के बराबर है|"

    ज़रा सोचें क्या यह सही है!!!

    नहीं ना ! तो फिर कैसे हो सकता है कि ईश्वर से बढ़कर कोई होगा |

    मेरी माँ, आपकी माँ और इसी तरह करोणों अरबों की माँ और उन माँओं की माँ और बाप को भी किसने बनाया --- ईश्वर ने |

    यही सनातन सत्य है- यकीन ना हो तो सबसे पुराने ईश्वरीय ग्रन्थ - वेद को पढ़े |

    भ्रूण हत्या कौन करता है, एक माँ अपने ही अंश की हत्या कर देती है | मैं यहाँ यह नहीं बताना चाह रहा कि जिस माँ को आप ईश्वर का दर्जा दे रहें हैं वह हत्यारी है| सभी माएं ऐसी नहीं होती |

    उपनिषद के अनुसार- "एकम् ब्रह्म द्वितीया नास्ति! नास्ति, नास्ति, नेह्न्ये नास्ति |"

    यानि

    "ईश्वर एक है, दूसरा नहीं है| नहीं है, नहीं है, ज़रा भी नहीं है|"

    यजुर्वेद के अनुसार- "ना तस्य प्रतिमा अस्ति|"

    उसकी कोई छवि (मूर्ति) नहीं हो सकती|

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  5. kewal "ekam brahm dwitiyo nasti " se hi sanatan dharm sampurn nahi hota aur na hi kisi ek dharm granth ke aadhar par wyakhyaayit kiya ja sakta hai . wiwidhtao se bhara aur lachila hai wishw ka sabse purana dharm . dharm to ek prakar ki aadat hai . sabhi ki aadaten ek nahi ho sakti ye hamare purwaj bakhubi samajhte the tabhi to wiwidhta ko swikar kiya gaya .

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  6. @जयराम जी,

    यानि आपने सिरे से ही ब्रह्म सूत्र को नकार दिया, हाँ आपका कहना यह बिलकुल ही सही है कि केवल एक ही धर्म ग्रन्थ से ही ईश्वर या ग्रन्थ की व्याख्या नहीं हो सकती है अर्थात अगर हमें एक से ज़्यादा या सभी में एक जैसी बातें या सन्दर्भ मिल जाते हैं तभी ही ईश्वर के एक होने की बात सत्य होगी या होनी चाहिए | आपने सही कहा|

    अब आगे मेरा कहना यह है कि आप वेद, उपनिषद या पुराण आदि के साथ-साथ कुरान और बाइबल को उठा कर देखें तो सबसे ही उस ब्रह्म सूत्र को कहा गया है- जैसे कुरान में लिखा है---

    "अल्लाहो अहद" यानि "अल्लाह एक है" और फिर "ला-इलाहा-इल्लल्लाह" यानि "अल्लाह के सिवा कोई उपास्य (पूज्य) नहीं है"| बाइबल उठाईये -- लिखा मिलेगा -- "God is One."


    आगे लिखा है आपने कि लचीलापन है, यानि उदारतापूर्ण है -- देखिये उदारता की आड़ में ही तो सब फसाद है | अति उदारवादी होना ही विनाश की जड़ है मेरे भाई - यकीन नहीं आता तो अमेरिका हो देख लो |

    और हाँ किसी की आदतों से धर्म और ईश्वर की परिभाषा तय नहीं होती और ना ही जो हमारे पूर्वजों ने किया उससे| हम भी तो कभी किसी के पूर्वज होंगे |

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  7. kya tumna iswere ko aapane aas pass mahsus kiya hai. agar Is sansar me maa na hoti to tumhara janam nahi ho sakata tha. To tum Iswere ki Bhakti kasie kar sakta The Agar tumahara Janam Nahi hota to Bina Janam Liya kasi Iswere Ki bhakti kar sakte. jab Tumhari maa ne tumhai Janam diya hai Thabi To tum Iswere Ki bhakti kar rahai ho.

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  8. please come http://www.hindusthangaurav.com/books/jihad&gairmuslim.pdf

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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