Monday, March 30, 2009

विकल्पहीन नही है दुनिया

पप्पू यादव ऊपर लिखे गए पोस्ट पर जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि "क्या इनका कोई विकल्प नही है ?" पेश है इसका जवाब --------

कपिला जी निराशा की नही बल्कि जाग्रति की बेला है । किशन पटनायक की एक किताब पढ़ी थी पिछले दिनों "विकल्प हीननही हैं दुनिया "। वाकई ये दुनिया विकल्पों से परिपूर्ण है । पर , इस मामले मैं प्रथमदृष्टया कोई विकल्प नही दिखता । हम अक्सर सत्ता परिवर्तन को विकल्प मानने की भूल करते हैं जो जे.प आन्दोलन में भी हुआ । आज व्यवस्था परिवर्तन की जरुरत है ............. लोग प्रयास रत है । यह कम वैसे भी एक दिन में संभव नही है । किसी भी बदलाव के पीछे लम्बी पृष्ठभूमि तैयार करनी पड़ती है । कुछ अच्छे लोग सक्रीय राजनीति में आयें और बांकी अपने अपने जगहों से भागीदारी निभाए सारी समस्या धीरे-धीरे ख़त्म हो जाती । जरा गौर से देखें तो यह सब भी एक दिन में बैठे-बिठाये नही हुआ है । भ्रस्ताचार व अपराधीकरण का दीमक वर्षो में जाकर इस लोकतंत्र को खोखला करने में सफल हो पाया है । उसी प्रकार समय के हिसाब से सब ठीक होगा . आज देश एक नए लोकतान्त्रिक जागरण की मांग कर रहा है । हम में से कुछ लोगो को इस आन्दोलन की नीव बनना पड़ेगा जिसके लिए हमें अपने सोये साथियों को जगाने का जिम्मा उठाना है । मैंने तो शुरुआत कर दी है आप भी आगे आयें । हम होंगे कामयाब ,हम होंगे कामयाब ।एक दिन हो हो मन में हैं विश्वास .................................

1 comment:

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--- संजय सेन सागर

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