Saturday, March 28, 2009

जब उदय हुए होगे ,,हे भारत

जब उदय हुए होगे ,,हे भारत
नदिया भी गीत सुनायी होगी
शीतल मंद हवाए नाची
रजनी भी मंगल gaayeeहोगी
पुरखे भइ खुश हुए होगे
जब झरने ढोल बजाये होगे
मागतटी पिता का हस्त चेहरा
बुआ तो काजल लगाई होगी
नेग देने के खातिर बटुआ
बाबा से आजी लाई होगी
नाना नानी भेजे होगे
प्रेम भरा खुछ उपहार
मामा की कमर पाकर के चाचा
द्वार तेरे घुमाये होगे.

2 comments:

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--- संजय सेन सागर

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