Tuesday, March 31, 2009

प्यार की पाठशाला

घूमते-घूमते यूपी लाइव न्यूज़ पर पहुंची और एक अच्छी और बुरी दोनों खासियत वाली पोस्ट पर नजर पड़ गयी इसलिए यूपी लाइव न्यूज़ से साभार यहाँ प्रकाशित कर रही हूँ

कुछ वर्ष पहले एक फिल्मी गाना सुना था कोलेज में होनी चाहिए प्यार की पढ़ाई ,हमें नही पता था की वो गाना आज के स्टुडेंट सच कर के ही रहेगे
स्कूल ने प्यार को भले ही अपने सेलबुस में न रखा हो मगर विद्यार्थियों ने इस
विषय को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है जिसे पढ़कर वो जीवन की परीक्षा पास करने का सपना दिन में और खुली आँखों से देख रहे है ।
माँ बाप के वो सपने जो न्होंने देखे,स्कूल में एक प्रेमी के बाहों में दम तोड़ दे रहे है ,प्यार करना ग़लत तो नही है लेकिन हर कम के लिए एक समय होता है लेकिन आज के बच्चो को भला सब्र कहा है ।
ये तस्वीरे साफ कह रही है की आज के स्टुडेंट kis तरह अपने पढ़ाई
और अपने परिवार के प्रति बेईमानी कर रहे है और प्यार की ये पढ़ाई जब दुनियादारी की इम्तहान में फ़ैल कर देती है तो ये समाज को ही दोष देते फिरते है । इस तरह के लोग जो इसी तरह पढ़ा
ई कर आए है और अब दर दर भटक रहे है महज एक नौकरी के लिए वो भी नही मिलती , भाई इस तरह के प्रेमियो से मै तो कहूगा की जब उनके पास छोकरी है तो नौकरी की क्या जरुरत है आखिर आप ही तो कहते थे प्यार खायेगे प्यार

पहनेगे प्यार पियेगे और प्यार पे ही सो जायेगे ,फिर क्यो परेशां हो भाई करो खूब करो प्यार ।
आगे पढ़ें के आगे यहाँ

5 comments:

  1. अच्छा खुलाशा तो नहीं कहा जा सकता
    क्योंकि यह तो अब आम बात हो गयी है
    लेकिन दुखद जरुर है

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  2. मुझे नहीं लगता की यह प्यार करने का समय है या उम्र है
    पता पिता के सपनो को यूँ तोढ़कर युवापीड़ी सब कुछ गवा रही है

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  3. सच कहूँ तो मैं भी यह देख देख कर दुखी होता हूँ.... की किस तरह बच्चे अपने माता पिता की दी हुयी आजादी का गलत इस्तेमाल कर रहे है... ये सब देख कर लगता है .. फिर से बाल विवाह सुरु हो जाना चाहिए...

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  4. bilkul sahi aapne likha hai yeh hamari tahzeeb vo sanskriti nahi hai aise kukarm se hume bachna chahiye aur isse dooron ko door rehne ki salah bhi deni chahiye.....

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  5. आज कल वक़्त जिस तेजी से बदल रहा है
    बच्चे भी वक़्त से पहले बड़े होने लगे है
    जो बात हमारे वक़्त में..हमहे पता भी नहीं रहती थी ..आज कल वो सब कुछ
    बच्चे खुलेआम कर रहे है .......शर्म की बात है ...
    क्या सोच के माता पिता अपने बच्चो को पढने भेजते है और
    बच्चे किसी दिशा में अपने कदम बड़ा रहे है ????????

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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