Friday, March 27, 2009

कही लुप्त न हो जाए ये कोमल बचपन

बढती महगाई , गरीबी और बेरोज़गारी आदि आज के दौर अपने आप में एक बड़ा सवाल बन कर रह गयी है। एक ओर गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीरों का अकाउंट बैलेंस दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। सवाल यह नही की अमीर क्यों अमीर ज़्यादा बढ़ता जा रहा है, गरीब और गरीब क्यों है? बल्कि सवाल यह है की इस बढती महगाई और गरीबी में सबसे ज़्यादा मासूम और कोमल बच्चे पिस रहे है । गरीबी से तंग आकर इनके माँ बाप कम उम्र में ही इन्हे मजदूरी करने के मजबूर कर देते है। इन बच्चों की मजदूरी करने की नही बल्कि पढने और खेलने कूदने की है। यह बच्चे ही आने वाले दिनों वो समय में देश की शान और पहचान बनेगे और यह हमारी परम जिम्मे दारी है की हम उन्हें बेहतर वर्तमान मुहैय्या करवाई। पर आज स्थिथि इतनी ख़राब है की कोई बच्चा रिक्शा चला रहा है कोई चाय की दूकान पर " छोटू" बनकर जूठे कप उठा रहा है तो कोई किसी घर में डोमेस्टिक हेल्पर का काम करते हुए अपने मालिक की जूता की मार झेल रहा है। इन बच्चों की भी जीवन से कुछ अपेछायें होंगी , पर वे अपनी इच्छाओं को पुरा करने के लिए कुछ नही कर सकते? क्या हम इन बच्चों के मौलिक अधिकार नही दिला सकते ? अगर हम चाहे तो यह सम्भव है। पर इसके लिए पुरे समाज की दृढ़ इच्छाशक्ति लाजिमी है। अगर हम बच्चों की ज़िन्दगी सुधारने का पर्ण ले ले तो यह नामुमकिन नही है, इससे इनके खोये हुए दिन को एक सुनहरे दिन में तब्दील कर सकते , इनके ख्वाबों को साकार किया जा सकता है , बस ज़रूरत है हमे और आप को इसमे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने का।

1 comment:

  1. achchha likha, padha tha aaj amarujala ke rupayan men huma naam kii ladki ne likha tha jo aligarh ki thi

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--- संजय सेन सागर

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