Sunday, March 29, 2009

काया की माया ने


काया की माया ने
आज़ादी का बेजा फायदा उठाया
ये कहती है ....सबसे
रंग दो अपने सपने ...
इस नंगेपन में ......
इस सोच ने दिया ..
समाज को एक नया झटका ...
सौप दिया अपना नंगा बदन
देखने वालो की आँखों को
ये सजनिया है तो चितचोर
पर सभी देखने वाले कहें ......
ये दिल मांगे कुछ और ....वंसमोर ,वंसमोर
(once more)
इस नगे बदन ने
कमज़ोर नसों में भी जान है भर दी
अब ये बात झूठ सी लगती है
कि......
शरम और हया है औरत का गहना
आज तो है
मोडल्स और मिस इंडिया का ज़माना
अब तो यहाँ गृहणी की जगह
मिसिस इंडिया कि है दौड़ लगी ......
ये है काया कि माया .........
(.....कृति....अनु.......)

2 comments:

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--- संजय सेन सागर

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