Sunday, March 29, 2009

ग़ज़ल

खवाब में जो कुछ देख रहा हूँ इस का दिखाना मुश्किल है
आईने में फूल खिला है हाथ लगाना मुश्किल है।
उसके कदम से फूल खिले हैं मैंने सुना है चार तरफ़
वैसे इस वीरान सारा में फूल खिलाना मुश्किल है।
तनहाए में दिल का सहारा एक हवा का झोंका था
वो भी गया है सोने बयाबा उसका आना मुश्किल है।
शीशा गारों के घरों में सुना है एक परी कल आई थी
वैसे ख्यालो ख्वाब हैं पारिया उनका आना मुश्किल है
अलीम आज़मी

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--- संजय सेन सागर

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