Saturday, March 28, 2009

जब बच्चे को दूध नहीं मिलता

जब ढूध नहीं मिलाता बेटे को
माँ कितना झल्लाती है//
बोतल फेम देतीधरणी पर
पति को आँख दिखाती है//
मेरा बेटा ऐसा सो गया
तुम तो घर में सुस्ताओ गे
अगर हुआ मेरे बेटे को कुछ तो
जीवन भर पछताओ गे
पिता पुत्र की पीरा सुन कर
चल देता है गों छोर कर
शहर के अन्दर आ करके
कुछ दिन घुमे इशार उधर
कठिन कार्य करता जीवन में
खुशिया वापस आ जाती है,,
हंस कर माँ बच्चे को
बोतल से दूध पिलाती है,,,

2 comments:

  1. आपकी दोनों रचनाओ में समानता है की आपका लेखन प्रभावशाली है

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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