Saturday, March 28, 2009

अजन्मी बच्ची की पुकार .........


अजन्मी बच्ची की पुकार .........
माये ..क्यों तू ही मेरी दुश्मन बनी
क्यों तू खुद को ही मारने चली ...
किया तुने एक घर को रोशन
एक बंश बेल को बढने दिया ...
फिर क्यों ????????
तूने मानी सब की बात
क्यों नहीं सुनी अपने दिल की आवाज़
ओह माँ ......ओह माँ
क्यों तूने जन्म से पहले मेरी बलि देदी ??????
(.....कृति....अनु......)

4 comments:

  1. बहुत उम्दा लिखा है आपने

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  2. अनुराधा जी आज आपकी दोनों रचनाओ ने दिल जीत लिया
    बहुत खूब!

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  3. bahut hi lajawaab likha aapne anuradha ji jitni tareef ki jaye kam hai

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  4. aap to suru se hi...bahot ambitious rahi hai...har ush cheez ko pana chaha hai...unhe samajhna chaha hi...jise duniya...bekar samajh kar fek detih ai...agar aapne yeh jo v likha hai..wo to uska ansh matra v nahi hai...ap ish se bhi jyada kuch likh sakte ho...ham aapke talent pe shak nahi kar sakte....

    Bahot 2 achaa likha hai...sathi...

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--- संजय सेन सागर

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