Sunday, March 15, 2009

माटी मेरे देश की

शत्रुओं को सदा मुँहतोड़ देती है जवाब
किन्तु मित्र की है मित्र माटी मेरे देश की
भारत की रक्षा करें मौत से कभी न डरें
ऐसे देती है चरित्र माटी मेरे देश की
शौर्य की भी जननी है शान्ति की भी अग्रदूत
सचमुच है विचित्र माटी मेरे देश की
सीने से लगाओ चाहो माथे से करो तिलक
चंदन से भी पवित्र माटी मेरे देश की

माँ समान ममता की छाँव देती है सभी को
बांटती असीम प्यार माटी मेरे देश की
अन्नपूर्णा समान आशीषों से पालती है
स्नेह का है पारावार माटी मेरे देश की
वीरता अखंड बुद्धि बल में प्रचंड और
पापियों पे है प्रहार माटी मेरे देश की
दुष्ट का दमन करे वीरों का सृजन करे
शक्ति स्रोत है अपार माटी मेरे देश की

क्रूर पापी देशद्रोहियों के बाजू बढ़ रहे
सह रही अत्याचार माटी मेरे देश की
काल सम झेलती है देखो आज दिन रात
बम गोली तलवार माटी मेरे देश की
अपनों की गद्दारी से हुई बेबसी में सुनो
युगों युगों से शिकार माटी मेरे देश की
शूरवीरों आगे आओ दुःख धरा का मिटाओ
आज करती पुकार माटी मेरे देश की

अरुण 'अद्भुत'

2 comments:

  1. अरुण जी अच्छा लिखा है

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  2. अच्छी नज्म दोस्त

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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