Thursday, March 12, 2009

109 साल की उम्र में भी कायम है देशभक्ती का जज्बा


ग्वालियर। दिल में जज्बा हो तो किसी काम को करने के लिए उम्र आड़े नहीं आती। ग्वालियर में रहने वाले 109 साल के बुजुर्ग अपने शहर में लगी स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों के रखरखाव में लगातार जुटे हैं।


आजादी की लड़ाई में जिन लोगों ने योगदान दिया उनमें से एक है कक्का डोंगर सिंह। 109 साल के कक्का डोंगर सिंह आज भी युवाओं को इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि आजादी की जंग के नायकों को वे याद रखें क्योकि उनकी वजह से हम आजाद हैं।
ये देन है उन वकील बैरिस्टर और बुद्धीजीवियों की जिन्होंने अपना सब कुछ खोकर हमें लोकतंत्र की तरफ भेजा और लोकतंत्र स्थापित किया। कक्का डोंगर सिंह ने आजादी के बाद कोशिश की कि ग्वालियर में उन महापुरषों की मुर्तियां लगायी जांए जिन्होंने आजादी की जंग का नेतृत्व किया उनकी कोशिशे रंग लायी। महात्मा गांधी, डॉक्टर अम्बेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, रानी लक्ष्मीबाई जैसी कई लोगों की प्रतिमाएं ग्वालियर में लगाई गईं। अब कक्का डोंगर सिंह इन मूर्तियों की लगातार खुद सफाई करते हैं।
कक्का को अभी भी इस बात का मलाल है कि जब पूरा देश 15 अगस्त 1947 को आजादी का जश्न मना रहा था उसी दौरान रियासत कालीन सत्ता कि वजह से ग्वालियरवासी तिरंगा नहीं फहरा पाये थे।

कक्का ने कहा कि हमने यहां आंदोलन चलाया इसलिए ग्वालियर राज की समाप्ति 24 जनवरी 1948 को हुई। 24 जनवरी 1948 को तिरंगा सामूहिक रूप से फहराया और जश्न मनाया।

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2 comments:

  1. काश आज यही जज्बा हमारे देश के नौजवानों में होता तो आज देश की दशा कुछ और ही होती, मगर आज का नौजवान तो अपने देश के प्रेम का जज्बा तो भूल ही चुका है साथ ही तरह तरह की गलत आदतों में पड़कर देश को डुबोता जा रहा है |

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  2. यंगिस्तान के लिए देखना होगा की वो क्या नहीं कर सकते!
    जय हिन्दुस्तान -जय यंगिस्तान

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--- संजय सेन सागर

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