Friday, April 10, 2009

एक मासूम लड़की का आखिरी ख़त अपने माँ के नाम...उसने क्या क्या नहीं सहा आखिर एड्स ने उसकी जिंदगी तबाह कर दी और बह 12th पास नहीं कर पायी

आज आप लोगों को एक बात बता दूं की की जिस लड़की ने कल आत्महत्या की उससे मैं बहुत प्यार करता था लेकिन वो मुझे नहीं मैंने उसे एक बार बताया की मैं उससे प्यार करता हूँ तो उसने इनकार कर दिया क्योंकि बह तब सिर्फ 16 साल की थी और पड़ने वाली थी ! मैं उसे भूल चुका था लेकिन कल जब यह खबर मेरे कानों मे पड़ी तो दिल रो पड़ा और सोचने पर मजबूर हो गया की बह लड़की ऐसा कर सकती है और क्या इतना कुछ उसके साथ हो सकता है जिसकी दुनिया सिर्फ किताबो तक थी!
इतनी छोटी सी उम्र मे इतना बड़ा कदम,आखिर क्या हो रहा है यह !ये सवाल हर बच्चे से जो अपने सपनो की चाहत मे अपने माता-पिता का दिल और उनके अरमानो को चूर-चूर करते नजर आ रहे है !!ये ही बारदात को पेश करती हिन्दुस्तान का दर्द की एक ख़ास रिपोर्ट!!


ऐसी ही लड़की का एक आखिरी ख़त अपनी माँ के नाम


माँ................


माँ मैं आपसे और पापा से बहुत प्यार करती हूँ और आप लोगों को छोड़कर जाने का दिल भी नहीं करता पर क्या करूँ हालत ही कुछ ऐसे हो गए है की मुझे जाना पड़ेगा !माँ मैंने आपसे एक बात छुपायी थी जो अब बताने जा रही हूँ ,वो ये की माँ मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती थी ,और मुझे लगता था की बह भी मुझसे प्यार करता है ,पर शयद मैं गलत थी और यही गलती मुझे यहाँ तक ले आई है !माँ एक दिन उस लड़के ने मुझे मिलने के लिए लड़कों के हॉस्टल मे बुलाया तो मैं उससे मिलने के लिए वहा गयी ! उसने पहेले तो दरवाजा बंद किया और फिर बह गलत हरकत करने लगा मैंने मना किया तो बह मुझसे नाराज हो गया..और आप तो जानती है न माँ मैं किसी का दिल नहीं दुखाती क्योंकि आप ही कहती है न की कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए! उस दिन मैंने उसकी बात मान ली !माँ सच उस दिन मुझे बहुत दर्द हुआ पर मैं बहुत खुश थी क्योंकि सौरभ को खुशी मिली थी !! हां माँ उस लड़के का नाम सौरभ ही था!कुछ दिन बाद मुझे पता चला की मैं प्रेग्नेंट हूँ


तो मैं घबरा गयी..मैंने ये बात सौरभ को बताई तो उसने गर्वपात करवा दिया ..माँ मुझे अब बहुत दुःख होता है की इतना सब कुछ आपसे छुपाया पर, मैं क्या बताती आपको की आपकी १७ साल की गुडिया एक बच्चे की माँ बनने वाली है....इतना बताने की हिम्मत नहीं थी मुझमे !!माँ तुम कहती थी न मुझसे की आजकल मैं खुश नही रहती क्या बात है ..हां माँ यही बात थी !!दिल मे कुछ होंसला और जीने की हिम्मत पैदा हुई ही थी की मैं फिर गिर पड़ी ! एक दिन मुझे डॉक्टर ने फ़ोन करके बुलाया यह बही डॉक्टर थी जिसने मेरा बच्चा गिराया था !! मैं वहा गयी तो मुझे पता चला की मुझे एड्स है...जिन्दगी ख़त्म थी!! हां माँ आपकी १७ साल की गुडिया को एड्स हो गया था !

क्योंकि माँ सौरभ को एड्स था


बताओ? माँ क्या ऐसे मे मुझे जीना चाहिए था , नहीं ना माँ!इसलिए आपको छोड़कर जा रही हूँ ! जानती हूँ की आप नाराज हो , बहुत नाराज हो ! पर तो सिर्फ किसी दिल दुखाना नहीं चाहती थी !आप मुझसे बहुत प्यार करती हो ना माँ ,मैं जानती हूँ की हर माँ अपने बच्चे से बहुत प्यार करती है क्योंकि मैं भी तो माँ बन चुकी हूँ ना !माँ तुम चाहती थी और मैं भी चाहती थी की 12th के बाद डॉक्टर बनूँ पर ऐसा नहीं हो सका मुझे माफ़ कर दो!माँ आपके साथ गुजरे १७ साल मेरे लिए सब कुछ है और मैं पापा और भाई से भी बहुत प्यार करती हूँ !माँ अब मैं चलती हूँ हो सके तो मुझे माफ़ कर देना !अच्छा मम्मा बाय- वो रस्सी मेरा इंतज़ार कर रही है!



30 comments:

  1. sach yuva peedi aajkal ma baap ke sapno ko bhoolti ja rahi hai ..aapka yah patra kafi maarmik tha ..jo har patthar dil ko mom bana sakta hai!!

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  2. bahak jaate hai..still protection to use karna hi tha ..
    jeenen ki kimat hoti hai ..kab samjhenge ye kishor

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  3. बहुत ही खूब संजय जी!!!
    लेकिन यह बात सच बेहद चिंताजनक है की आज युवापीड़ी पतन के रास्ते पर आगे बाद रही है और संस्कार जो हमारे हुआ करते थे वे आज कही बिलुप्त होने जा रहे है !!
    आपका प्रयाश बहुत अच्छा लगा!!

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  4. संजय जी .,
    ये घटना दिल को झकझोर देने वाली हैं
    ये हमारे समाज के सामने सवालिया निशान पैदा करती इसका हल क्या हैं .....

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  5. इस पोस्ट ने मेरे मन मे जो फांस छोडी उसका निकल पाना संभव नहीं है !!
    लेकिन हम असलियत से मुह भी तो नहीं मोड़ सकते !!
    यह सच है और इसके साथ ही हुम्हे जीना है !!!इसी बिलाप के साथ!!!

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  6. आज के बच्चो पढ़ पाना कठिन होता जा राह है
    आपके लेख ने सोचने पे मजबूर कर दिया ....
    ये तो हम्हारे संस्कार नहीं जो आज के बच्चे ग्रहण
    कर रहे है .......बहुत मार्मिक ख़त है ...ये सच से लबालब

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  7. आज के बच्चो पढ़ पाना कठिन होता जा राह है
    आपके लेख ने सोचने पे मजबूर कर दिया ....
    बहुत मार्मिक ख़त है ...ये सच से लबालब

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  8. दिल शांत पड़ गया,धड़कन थमी हुई है यह लेख पड़कर
    सच एक झटके मे ही दिमाग शून्य पड़ गया है इस तरह की स्तिथि से निपटने के लिए कोई भी कतई तैयार नहीं है !!!
    बहुत बढ़िया बात बताई आपने!!

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  9. चिंताजनक घटना !!
    लेकिन जिस तरह से आपने इस घटना को बताया वह सबकी की जान लेने वाला था!!
    ब्लॉग के इतिहास की सबसे प्रभावशाली पोस्ट !

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  10. संजय जी
    बहुत अच्छा किया आपने यह सच दिखा कर। इसीलिए साधु- संतों ने कहा है- सबसे पहले अपने भीतर के विवेक को सुनना चाहिए। यानी अंतरात्मा की आवाज। तब कोई कदम उठाना चाहिए। हमारी इंद्रियां और चित्त हमें भटकाने को तैयार हैं। सवाल है कि हम उनके वश में हैं या वे हमारे वश में । यही विवेक हमेशा साथ रहे, तो मनुष्य गिरने से बच जाता है।

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  11. is ghatna ne bolti band kardi.samajh me nahi aa raha kya kahu.....

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  12. sanjay ji , ye ek nahi hajaron-lakhon ladkion ka khat hai. fark sirf itna hai ki is bechari ne sach bolne ki himmat dikhai lekin aise hajaron ladkiyan hain jo boys hostal mein har din muh kala kar khud par garw karti hain aur unka sathi ladka swam ko mard mahsoos kar garv karta hai, ..
    sawal yeh hai ki in sab ka jimmedar kaun hai wo ya ham(samaj) jo unnhe in sab ki shiksha deta hai. ya fir maikale ki banai shiksha paddhti ya aadhunik hone ki hod .? jabab dhundiyega ......................
    kafi sahi mudda uthaya hai mein bhi aaj ek ghatna isi se judi hai ,us par likh raha hoon

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  13. बहुत गहरी बात कह दी आपने संजय जी.,और इस अंदाज़ में कही की जान ही निकल गई !!
    बेहद उम्दा!!

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  14. apne sach kaha th ablogging itihas ki sabse achi post
    jiavn ke mahatvpurna pahlu sabko sochne par majbur karte hain
    mene jab khtt pada
    uski ek line ki mummy ap logo ke sath beete 17 sal yad rahenge
    rona aa jata hain.....

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  15. bahut dukh bhari kathaa kahi hai aapne,,,,,,,,
    bas,,,kuchh samjh hi nai paati ye nai peedhi,,

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  16. झकझोर देने वाली पोस्ट है ये तो...

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  17. संजय जी यहाँ जिंतने बार भी यहाँ यह पोस्ट पडी और उतनी बार ही रोना आया!!

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  18. रोना तो आ ही जाता है लेकिन क्या किया जा सकता है जब हमारे समाज की असलियत ही यही हो तो!

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  19. wah!!!!!!!! sanjay
    kya bat hai bhut khub yar

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  20. Duniyaa ko dikhaane jo chala dard mai apne
    har ghar me dikha mujhko to dukh dard ka saaya
    Maarmik...Hriday vidaaran, ...

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  21. अच्छी पोस्ट है !!

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  22. sanjay ji
    aapne aaj ki haqeeqat bayan ki hai.......ek kadva sach...........jiska hal to dhoondhna hoga.

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  23. बहुत ही मार्मिक पोस्ट

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  24. sanjay ji bahut accha likha esse jyaada kuch nahi kyonki likhne ko nahi sochne ko majbur hua ja raha hoon.

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  25. घटना वाकई बहुत मर्म स्पर्शी और दुखद है, आज कल की युवा पीढ़ी शादी से पहले सोहबत करने को आम समझती है और या तो भावनाओं में बह कर या आवेग में आकर यह भूल करती ही जा रही है!

    शादी से पहले सेक्स करना निषेध है और गलत भी !

    "Sex before marriage is Zina and is haraam in Islam and there is big punishment for commiting this haraam act."

    कुरान में किस जगह इस बात का उल्लेख है कि अवैध शारीरिक संबध बहुत गलत है और इसकी सज़ा भी बहुत भयानक है ! सम्बंधित आयतें पढ़े अल-कुरान 17:32, 24:2, 24:4

    अब सज़ा तो किसी भी तरह से हो सकती है तो ईश्वर एड्स जैसी भयानक बीमारी इन्सान में पैदा कर देता है |

    स्वयं पर कंट्रोल और नियमानुसार चलने के लिए मुझे नहीं लगता कि इन्सान को कोई ज्यादा दिक्कत होनी चाहिए, मगर हमारे समाज में यह सब ख़त्म सा होता जा रह है!!!

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  26. संजय जी इस पोस्ट को कम से कम दस बार पढ़ा है और जितना भी पढ़ा उतना जायदा पढने का दिल करता है
    बेहद मार्मिक पोस्ट है

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  27. सच जी कर रहा है की खूब जोर जोर से रोऊँ !
    बेहद भावुक पोस्ट
    संजय जी आपका दिल बहुत मजबूत है

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  28. ..............समय बदलता है....समय के साथ स्थापित मान्यताएं बदलती हैं....मान्यताओं के साथ संस्कार.....संस्कारों के साथ परम्पराएं भी... और परम्पराओं के बदलते ही जीवन की गति.....इच्छाएं....मनोवेग....आदि सब बदलती ही दिखाई देती हैं....सवाल यह नहीं है कि पढाई नहीं हो रही या ऐसी ही कोई बात...इस मार्मिक से पत्र में सवाल यह कि एक पुरुष जो स्त्री के द्वारा प्रेम में समर्पण में किये गए सेक्स का क्या सिला देता है.. !!
    आदमी कभी बहक भी जाता है...मगर उसके बाद की जिम्मेवारी भी उसकी बनती है....इसी तरह सब पुरुष स्त्रियों को दगा देकर भाग लें तो वफ़ा नाम की पाक चीज़ का क्या होगा....??.........बेशक गलतियां होती हैं.....मगर उनको सुधार लेना ही तो आदमियत है....किसी को मरने की कगार तक ला खडा करना तो हैवानियत ही है ना.........वो चाहे सौरभ हो या कोई और....!!..........और हर घटना किसी दुसरे के लिए एक उदाहरण.....!!.........क्या इसका हम सबके लिए कोई सबक है......!!??

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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